अपने व्यवसाय का पंजीकरण कराने हेतु क़ानूनी कार्रवाहियां

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मुझे हमेशा से पता था की अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना कोई हास्य नहीं है| किसी भी छोटे व्यवसाय को शुरू करने से पहले हज़ार चिंताजनक बातें होती है| पर व्यवसाय शुरू करने में सबसे अहम बात होती है अपने व्यवसाय का क़ानूनी रूप से पंजीकरण करना अगर यह कार्य नहीं किया जाए तो सरकार की ओर से कई आपत्ति-यों का सामना करना पड़ सकता है|

इसलिए इस लेख की मदद से आपको जानकारी मिलेगी की किन व्यवसायों के लिए आपको सरकारी पंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है|

अलग अलग व्यवसायों के लिए अलग अलग कानून और नियम होते हैं| इंडियन कम्पनी एक्ट 2013  के तहत सभी तरह के व्यवसाय के लिए पंजीकरण से पहले और पंजीकरण के बाद के अलग अलग नियम दिए गए हैं|

1 ) सोल प्रोप्रिएटोरशिप  कंपनी के पंजीकरण से जुड़े नियम

भारत में असंगठित क्षेत्रों में कई व्यवसाय हैं जो इस प्रणाली के हैं| आप भी अपने व्यवसाय के सोल प्रोप्रिएटोरशिप  बन सकते है| यह सबसे आसान और किफायती उपाय है अपना व्यवसाय शुरू करने का|

 तो क्या आप अपनी कंपनी का पंजीकरण सोल प्रोप्रिएटोरशिप  के अंतर्गत करना चाहते हैं? यहाँ कुछ सरकारी नियम दिए हुए हैं जिनकी जानकारी आपको अपनी कंपनी का पंजीकरण सोल प्रोप्रिएटोरशिप  के अंतर्गत कराने से पहले होनी चाहिए|

  • आपकी कंपनी पूरी तरह से आपके काबू में है फिर चाहे वो कंपनी की अर्थव्यवस्था हो या कोई और औपचारिकता सभी फैसले आपके नियंत्रण में हो|
  • आपको किसी भी फैसले के लिए अपने भागीदारों या बोर्ड मेंबर की मंज़ूरी न लेनी पड़े| इस वजह से आप सरे फैसले जल्द कर पाएंगे|
  • आपको किसी भी प्रकार के फार्मेशन से जुड़े दस्तावेज़ों को राज्य या स्थानीय साकार के पास जमा करने की आवश्यकता नहीं है| इस वजह से आप उन सभी फ़ीस से बच पाएंगे जो बाकी कॉरपोरेशन या लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी को देनी होती है|
  • अपनी कंपनी के दिनचर्या को संभालने के लिए आप कुछ कार्यकर्ताओं को नियुक्त कर सकते हैं|

2 ) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पंजीकरण से जुड़े नियम

क्या आप अपनी कंपनी का पंजीकरण प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत कराना चाहते हैं? यहाँ ऐसे सरकारी नियम दिए गए हैं जिनकी जानकारी होना आपको भारत में अपनी कंपनी का पंजीकरण प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत कराने के लिए आवश्यक है| 

  • एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को शुरू करने के लिए आपको कम से कम 2 और अधिक से अधिक 200 लोगों की आवश्यकता होगी|
  • अगर आपकी कंपनी को नुकसान का सामना करना पड़ता है तो आपको भुगतान के लिए कंपनी की जमा पूँजी का इस्तेमाल करना होगा पर आपकी खुद की जमा पूँजी को इसमें नहीं जोड़ा जायेगा|
  • एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हमेशा हीं होती है| किसी भी भागीदार के निधन से या दिवाला निकल जाने से कंपनी को कोई नुकसान नहीं होता और इन कारणों की वजह से कंपनी बंद नहीं की जाती है|
  • इस व्यवसाय में भागीदारों की सूची रखनी पड़ती है|
  • एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में व्यवसाय को चलने के लिए 2 डायरेक्टर की आवश्यकता होती है|
  • आपके पास कम से कम Rs 1 लाख की पेड- उप कैपिटल (पूँजी ) होनी चाहिए जो समय के साथ बदलती रहती है|
  • आपकी कंपनी जनता को जवाब देने के लिए जिम्मेदार नहीं है| अन्य सार्वजनिक कंपनी की तरह आपको अपने कंपनी की जानकारी जनता को विस्तार में देने की कोई जरुरत नहीं है|
  • आपको अपनी कंपनी के नाम के पीछे प्राइवेट लिमिटेड जोड़ना बहुत ही आवश्यक है|
  • आपको अपनी पंजीकृत कंपनी का स्थानीय पता प्रदान करना होगा| इस पते पर आपके कंपनी के सरे दस्तावेज़ होने चाहिए और साथ हीं कंपनी के महत्वपूर्ण कार्य इसी स्थान पर होते हों|
  • आपको अपने व्यवसाय के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण-पत्र लेना होगा| यह कंपनी के हर दस्तावेज़ पर सभी डिरेक्टरों के द्वारा लगा होना चाहिए|
  • कंपनी निगम के वक़्त प्रमाण-पत्र हेतु आपको पेशेवर लोगों की मदद लेनी होगी जैसे, कंपनी सेक्रेटरी, चार्टर एकाउंटेंट, कास्ट एकाउंटेंट इत्यादि|

 

3 ) साझेदारी के व्यवसाय के पंजीकरण के लिए नियम 

अगर आप अपने मुनाफ़े के एक या उससे अधिक लोगों के साथ बाँटना चाहते हैं तो आप साझेदारी के व्यवसाय का चयन कर सकते हैं| क्या आप अपनी का पंजीकरण साझेदारी के अंतर्गत करना चाहते हैं? यहाँ कुछ सरकारी नियमों की सूची दी हुई है जिनकी जानकारी  आपको भारत में साझेदारी का व्यवसाय शुरू करने से पहले होनी चाहिए|

  • महाराष्ट्र राज्य को छोड़कर अन्य किसी भी राज्य में आपको साझेदारी व्यवसाय को पंजीकृत कराने की कोई आवश्यकता नहीं है| इंडियन पार्टनर-शिप एक्ट, 1932 के अंतर्गत साझेदारी व्यवसाय का पंजीकरण कराना आवश्यक नहीं है पर महाराष्ट्र में ऐसा करना अनिवार्य है|
  • आप अपनी साझेदारी का पंजीकरण किसी भी वक़्त या  सालों बाद भी करा सकते हैं|
  • कंपनी के सभी आवश्यक कार्यों में आपको अपने सभी भागीदारों की मंज़ूरी लेना अनिवार्य होगा (जैसे, नए भागीदार को शामिल करना, कंपनी बंद करना इत्यादि), और बाकी दूसरे फैसले बहुमत से लिए जायेंगे|
  • आपको सभी मुनाफ़े और नुकसान की जानकारी सभी साझेदारियों को विस्तार में देनी होगी|
  • आप सभी को मिलकर अपने व्यवसाय का नाम चुनना होगा और आपस में एक ऐसा समझौता करना होगा जिसमे आप सभी का बराबर हक़ हो|
  • यह समझौता मौखिक नहीं बल्कि लिखित होना चाहिए|
  • आप समझौते के नियम और शर्तें अपने अनुसार रख सकते हैं|
  • आप अपने नियम इंडियन पार्टनर-शिप एक्ट,1932 से अलग भी बना सकते हैं पर अगर आपने कोई नियम अगर छोड़ दिया हो तो वह इंडियन पार्टनर-शिप एक्ट,1932  के नियम लागू होंगे|

 

4 ) लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP ) को पंजीकरण कराने के नियम|

क्या आप अपनी कंपनी का नाम LLP के अंतर्गत पंजीकृत कराना चाहते हैं? भारत में LLP के अंतर्गत अपने व्यवसाय को शुरू करने और कंपनी को पंजीकृत कराने के लिए आवश्यक नियम यहाँ दिए गए हैं|

  • LLP के अंतर्गत भागीदारों को ऋण का भुगतान अपनी निजी पूँजी से नहीं करनी पड़ती|
  • कोई भी भागीदार दूसरे भागीदार के दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार नहीं होता|
  • कंपनी के फैसले केवल डायरेक्टर द्वारा लिए जाते हैं,इसमें  शरहोल्डर्स की भागीदारी काफी काम होता है|
  • LLP के अंतर्गत आने वाले व्यवसायों पर भागीदार के निधन, रिटायरमेंट या उनके दीवाले की वजह से कोई असर नहीं पड़ता है|
  • कंपनी से जुड़ने या कंपनी छोड़ने में किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं होती| आप अपना मालिकाना किसी भी वक़्त किसी को भी दे सकते हैं|
  • कर के दर दूसरे कंपनी के मुकाबले LLP में काफी कम होते हैं|
  • साथ हीं आपको कई सरे करों मुक्ति मिलेगी जैसे डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स और मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स|
  • आपको तब-तक ऑडिट कराने की जरुरत नहीं है जबतक आपका टर्नओवर Rs 40 लाख से अधिक न हो जहाँ  आपका योगदान Rs 25 लाख से अधिक न हो|

 

5 ) वन पर्सन कंपनी (OPC ) को पंजीकृत कराने के नियम 

OPC एक ऐसी कंपनी होती है जिसमे केवल एक हीं व्यक्ति डायरेक्टर और शेयरहोल्डर दोनों होता है|

क्या आप अपनी कंपनी का पंजीकरण OPC के अंतर्गत कराना चाहते हैं? भारत में OPC  के अंतर्गत अपने व्यवसाय को शुरू करने और कंपनी को पंजीकृत कराने के लिए आवश्यक नियम यहाँ दिए गए हैं|   

  • OPC  में केवल एक ही व्यक्ति होता है और वो आप होंगे| केवल एक अकेला व्यक्ति ही मेंबर बन सकता है,कोई दूसरी कंपनी/LLP नहीं|
  • आपको भारतीय होने के साथ साथ भारत में निवास भी करना होगा|
  • आपको एक ऐसा व्यक्ति चुनना होगा जो आपके निधन या आपके कंपनी छोड़ने के बाद उसका अगला मालिक बन सके|
  • नामाँकित व्यक्ति को भी भारत का निवासी होना अनिवार्य है|
  • आपको कम से कम एक डायरेक्टर को नियुक्त करना होगा|
  • जिस भी डायरेक्टर को नियुक्त किया जाए उसके पास डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN ) होना चाहिए जो की मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स द्वारा जारी किया गया हो|
  • कंपनी के नाम के अंत में प्राइवेट लिमिटेड (OPC ) होना चाहिए|
  • आपके कंपनी का नाम कंपनी के रजिस्ट्रार के द्वारा मंज़ूर किया जाना चाहिए| आपके कंपनी के नाम से आपके कंपनी का कार्य और उद्देश्य प्रदर्शित होना चाहिए|
  • पंजीकरण के वक़्त आपको अस्थायी पता देना होगा| यह पता किसी भी एक डायरेक्टर का पता हो सकता है|
  • पंजीकरण के बाद स्थायी पता पुरे प्रमाण के साथ प्रदान करना होगा|
  • आपके कंपनी का उद्देश्य क़ानूनी होना चाहिए जिससे समाज पर कोई बुरा असर न पड़े|
  • कंपनी रजिस्ट्रार के साथ आपको अपने कंपनी के सरे दस्तावेज़ ऑनलाइन फाइल करने होंगे|
  • आपको अपने व्यवसाय के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण-पत्र हासिल करने होंगे जिसे आपको अपने कंपनी के सभी दस्तावेज़ों पर दर्शाना होगा|
  • कंपनी निगम के वक़्त प्रमाण-पत्र हेतु आपको पेशेवर लोगों की मदद लेनी होगी जैसे, कंपनी सेक्रेटरी, चार्टर एकाउंटेंट, कास्ट एकाउंटेंट इत्यादि|
  • यदि आपकी कंपनी का सालाना टर्नओवर Rs 2 crores है तो आपको अपनी कंपनी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदलना होगा|

 

6 ) सेक्शन 8 कंपनी के पंजीकरण के लिए नियम|

सेक्शन 8 कंपनी एक गैर लाभ संस्था (नॉन प्रॉफिट आर्गेनाईजेशन NPO ) है| इसका उद्देश्य कला, वातावरण की सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान, खेल, धर्म, इत्यादि के बढ़ावा देना होता है| ऐसी कंपनी को शुरू करने के लिए आपको अपनी कंपनी का पंजीकरण मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA ) के अंतर्गत कराना होगा|

क्या आप सेक्शन 8 के अंतर्गत अपनी कंपनी का पंजीकरण  कराना चाहते हैं| भारत में सेक्शन 8 के अंतर्गत अपने व्यवसाय को शुरू करने और कंपनी को पंजीकृत कराने के लिए आवश्यक नियम यहाँ दिए गए हैं|

  • आप उद्देश्य मुनाफ़ा कमाना नहीं होना चाहिए|
  • आपका उद्देश्य पूरी तरह से सामाजिक कल्याण और जनहित में होना चाहिए|
  • सेक्शन 8 के अंतर्गत कंपनी शुरू करने के लिए आपको निर्धारित पेड-उप कैपिटल बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है|
  • आप और आपके भागीदारों के पास केवल लिमिटेड लिएबिल्टी होगी| आपकी लायबिलिटी कभी भी अन-लिमिटेड नहीं हो सकती|
  • आप अपना कार्य तभी शुरू कर सकते हैं जब आपके पास केंद्र सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त हो|
  • सामाजिक कल्याण का उद्देश्य होने की वजह से आपको कई सरे कर से छूट दी जाएगी|
  • व्यक्तियों,संस्थानों, के साथ साथ सेक्शन 8 के अंतर्गत दूसरी कंपनियां भी आपका हिस्सा बन सकती है|
  • आपको अपनी कंपनी के नाम के साथ लिमिटेड और प्राइवेट लिमिटेड जोड़ने की आवश्यकता होगी|
  • संस्थान के नियमों को बदलने के लिए आपको केंद्र सरकार की मंज़ूरी लेनी होगी|
  •  आप लाइसेंस के विरोध जा के कोई भी कार्य नहीं कर सकते|

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