ध्यान रहे! SME’s के लिए GST मदद भी करता है और नुक़सान भी पहुंचाता है

GST को SME’s के लिए इनडायरेक्ट टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए लाया गया था। लेकिन, इसके बजाय , ऐसा लगता है कि इसकी वजह  से देश में काफी उथल – पुथल मच गयी है । वास्तव में, व्यापारियों के दिमाग में GST को लेकर गलत धारणाएं चल रही हैं, जिससे उनके बीच भ्रम और भय पैदा हो रहा है।

ठीक है, अगर आप एक व्यापारी हैं  या एक बनने की सोच रहे हैं , तो ये महसूस करने के लिए कि आप सबसे टॉप पर हैं इसे पढ़ना आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है :

# GST के बाद बिज़नेस शुरू करना आसान हो गया  है

सबसे पहले, बॉस बनने के लिए ये बिलकुल सही समय है । इससे पहले, एक नए बिज़नेस को  सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट के तहत VAT रजिस्ट्रेशन करवाने की जरूरत होती थी और बिज़नेस  को बढ़ाने के समय अलग-अलग राज्यों में फीस और प्रक्रियाओं के साथ कई मुद्दे थे । अब ,GST के बाद, सेंट्रल रेजिस्ट्रेशन होने के कारण  ये प्रोसेस सब जगह एक जैसा हो गया है | इसके साथ , एक बिज़नेस को शुरू करना या विभिन्न राज्यों में इसका विस्तार करना बहुत आसान हो गया है। दूसरे शब्दों में, सभी  राज्यों में अलग-अलग इनडायरेक्ट टैक्सेज के कारण होने वाली परेशानियाँ ख़तम होने से आपको दूसरे राज्यों में बिज़नेस खोलना या बढ़ाना और आसान हो गया है ।

# छोटे व्यापारी GST के तहत कम  टैक्स चुकाते हैं

इससे पहले, 5 लाख रुपए (कुछ राज्यों में 10 लाख) के टर्नओवर वाले बिज़नेसेज को VAT रजिस्ट्रेशन  फीस का भुगतान करना पड़ता था। GST के बाद, केंद्र सरकार ने बेसिक छूट सीमा को 20 लाख तक बढ़ा दिया है, जो कि छोटे व्यापारियों और निर्माताओं  के लिए सीमा में 75 प्रतिशत तक की छूट है। छोटे बिज़नेसेज, बड़े फायदे ।

# आपके सामान / सर्विसेज की जल्दी डेलिवरी

GST नियम पूरे देश में बिज़नेसेज को बढ़ावा देंगे क्योंकि चेक पोस्ट पर कोई एंट्री टैक्स नहीं है। नतीजतन, यह अंतरराज्यीय सीमाओं पर सामान को जल्दी पहुँचाने  में मदद करता है । CRISIL के  अनुमान के अनुसार, थोक वस्तुओं के निर्माताओं के लिए लॉजिस्टिक्स की लागत में 20 प्रतिशत की कमी आएगी।

# उत्पादों और सर्विसेज  के बीच कम असमंजस

इससे पहले, उत्पादों और सर्विसेज  पर अलग – अलग टैक्स लगता था, सामान  पर VAT लगता था और सर्विसेज पर सर्विस टैक्स लगता था| उत्पाद और सर्विस  के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं था। उदाहरण के लिए, एक रेस्टोरेंट एक प्रोडक्ट आधारित हो सकता है या यहां तक ​​कि सर्विस-आधारित भी हो सकता है जो टैक्स चार्जेज के दौरान  असमंजस पैदा करता था । GST की स्तिथि में, अब सामान और सर्विस कॉम्पोनेन्ट (भाग) के बीच अंतर नहीं होगा, जो टैक्स चोरी को बहुत कम कर देगा। कुछ मामलों में, सामान और सर्विसेज के बीच अंतर होता है,जब वे पैकेज के रूप में बेचे जाते हैं । ये विवाद ख़तम हो जायेंगे ।

# निर्माता और उपभोक्ताओं पर लगने वाले टैक्सेज में कमी

निर्माता को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल जाएगा जिसको वे टैक्स लायबिलिटी  को ख़तम करने के लिए क्लेम कर सकते हैं | उपभोक्ता को केवल सप्लाई चेन के अंतिम  डीलर या रिटेलर द्वारा लगाए गए टैक्स का ही भुगतान करना होगा। इस कारण से , ज्यादातर चीज़ों की टैक्स रेट कम हो जाएगी जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी । संक्षेप में, उपभोक्ता के लिए उत्पादों और सर्विसेज की कीमत सस्ती हो जाएगी |

अंतिम शब्द

लेकिन यह जानना भी  जरूरी है कि हर चीज़ के अपने फायदे हैं तो नुक़सान भी हैं | इसके विपरीत,  अगर आप GST के लिए तैयार नहीं हैं तो SME’s पर GST के ज्यादा कंप्लायंस के बोझ  के अलावा कोई और बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है|

  1. सबसे पहले, असमंजस को संभालना  सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है
  2. मौजूदा टैक्स युग से GST में जाने से मुश्किलें  और असुविधाएं हो सकती हैं, यदि SME’s अपने अकाउंटिंग कार्य को करने के लिए टेक्नोलॉजी और प्रोसेस को काम में नहीं ले रहे हैं तो |  
  3. इसके लिए  SME’s कंपनियों को बिलिंग और फाईलिंग करने के लिए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सिस्टम की जरूरत  होगी।
  4. भाग्य से, ऐसा ही एक  अकाउंटिंग और बिलिंग सॉफ्टवेयर ‘व्यापर’ है, जो GST के अनुरूप  है। SME’S के लिए, ऐसे अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर का उपयोग करना बहुत अच्छी शुरुआत हो सकती  है।
  5. थोड़ी सी  मेहनत के साथ,  बिना किसी फ़िक्र के कि कैसे बही खाते  मेन्टेन होंगे,बिसनेस अकॉउंटिंग GST के अनुरूप हो जाती है |
  6. ऐसे बिलिंग सॉफ्टवेयर को काम में लेने पर  टैक्सेज का भुगतान करने में जो आपको कागजी कार्यवाही करनी  पड़ती है और समय ख़राब होता है वो कम हो जाता है और आपको GST का रिकॉर्ड रखने में भी मदद मिलती है |

हालांकि, GST SME’s के लिए अवसरों और चुनौतियों का मिला जुला  बैग है। जाहिर है, SME’s  के लिए GST अच्छा साबित होता है अगर दिक्कतों को अच्छी तरह से संभाला जाए |

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