पेट्रोल/डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं! आइए जानें अंदर की बात।

भारतीय तेल निगम में  पेट्रोल की कीमतों ने एक नई ऊंचाई को छू लिया।

मुंबई में पेट्रोल 84.07 रुपये प्रति लीटर, चेन्नई में 79.13 रुपये प्रति लीटर और कोलकाता में 78.91 प्रति लीटर में  बेचा गया।

आम भाषा में, आम आदमी आँसू बहा रहा है और बेमतलब  बढ़ती पेट्रोल की कीमतों पर ज़ार-ज़ार रो रहा है।

जिस हिसाब से पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं , लगता है वह दिन दूर नहीं जब गाड़ी को धक्का लगाने के लिए किराये पर लोग बुलाना सस्ता पड़ेगा(hoga) ।

पिछले कुछ महीनों में, डीजल की कीमतें भी हर थोड़े दिनों में नई नई ऊँचाइयों को छूती नज़र आईं। रविवार को, डीजल 67.57 रुपये प्रति लीटर दिल्ली में, 70.12 रुपए प्रति लीटर कोलकता में, 71.94 रुपए प्रति लीटर मुंबई में और 71.32 रुपए प्रति लीटर चेन्नई में बिका।

हालांकि, आम आदमी के लिए कीमत में मामूली बढ़त ठीक है लेकिन इस बार कीमतों में बढ़ोतरी को स्वीकारना बहुत मुश्किल है। आम आदमी को तेल भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर बहुत ज़्यादा कीमत देनी पड़ रही है जो उसकी सामान्य जीवनशैली को प्रभावित कर रही है। उसे सुविधा और पैसे बचाने के बीच में किसी एक को चुनना पड़ सकता है।

 

आइए देखें कि इसका प्रभाव उत्पादक, ग्राहक और मुख्य रूप से ट्रांसपोर्टर पर कैसे पड़ता है।

जैसे ही तेल  की कीमत बढ़ती है, सामान लाने- ले जाने वाले कीमतें बढ़ाने या नुकसान उठाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। बदले में, तेल  की कीमत  न केवल ट्रांसपोर्टेशन कंपनी पर बल्कि जहाज़ से माल  लाने- ले जाने वालों (शिपर )और ग्राहक पर भी असर डालती है । अगर माल ट्रांसपोर्ट करना, सामान लाने -ले  जाने वालों को महँगा पड़ता है तो शिपर से भी इसके लिए अधिक शुल्क वसूल किया जाता है। अगर  शिपर से माल ट्रांसपोर्ट के लिए अधिक शुल्क लिया गया, तो वह बदले में रिसीवर(माल ख़रीदने वाला ) से भी अधिक शुल्क लेगा। इसका मतलब यह है कि ट्रांसपोर्टेशन और तेल की बढ़ती कीमतों को वसूलने के लिए   ग्राहकों को माल बढ़ी कीमतों पर बेचा जाएगा । असल में, तेल की बढती कीमतों के कारण  सामानों  की कीमतें भी बढ़ जाती हैं  और इस महंगाई का असर सामान को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने वाले  हर पहलू पर दिखाई देता है |

नतीजतन, दूसरी ओर, इसके कारण खपत में ज़रूर कमी होगी  और साथ ही साथ वाहन यातायात के कारण होने वाले प्रदूषण में भी। ये  ऐसा कुछ है जिसपर हम ठहाका लगा सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह देखना दिलचस्प होगा कि तेल की कीमत आम आदमी की जीवनशैली को क्या आकार देती है और हमारी सरकार कैसे इसका जवाब देती है।

हम उम्मीद करते हैं कि सब ठीक होगा।

 

You May Also Like

Leave a Reply