भारत में एक रिटेलर बनें

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क्या आप उपभोक्ताओं को सीधे उत्पाद  बेचना / सर्विसेज देना चाहते हैं?
ठीक है, तो  एक रिटेलर होना आपके लिए सही ऑप्शन है |

एक बिज़नेस या उपभोक्ता को माल बेचने वाला व्यक्ति, जो कि होलसैलर(थोक विक्रेता) या सप्लायर के विपरीत होता है, रिटेलर कहलाता है | हर मैन्युफैक्चरर (उत्पादक) सीधे  उपभोक्ता को सामान नहीं बेच सकता है और इसी तरह हर उपभोक्ता अपनी जरूरतों के लिए मैन्युफैक्चरर (उत्पादक) तक नहीं जा सकता है । रिटेलर्स मैन्युफैक्चरर (उत्पादक) और उपभोक्ताओं को जोड़ने वाली कड़ी की तरह काम करते हैं  |

एक रिटेलर बनने के लिए जो सामान उपभोक्ताओं को बेचना है, वो तय कर लेना चाहिए । उदाहरण के लिए, कुछ प्रमुख  केटेगरी हैं, खाने का सामान , ऑटो पार्ट्स, जनरलस्टोर्स , परिधान, होम फर्निशिंग, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घर को सजाने में काम आने वाला सामान।

रिटेलर कैसे बनें?

एक बार जब कोई व्यक्ति अपने उत्पाद / सर्विसेज  को बेचने के लिए चुनता है, तो कुछ कानूनी पहलू जैसे कि  कंपनी को रजिस्टर कराना, जगह/ दुकान किराए पर लेना, सप्लाई को मैनेज करना, डिलीवरी मॉडल, रेवेन्यू मॉडल, टैक्स मैनेजमेंट और कंप्लायंस आदि  को पूरा करना पड़ता है|

चलिए, सिर्फ अनिवार्य कार्यों  पर एक नज़र डालें: GST के तहत कानूनी पहलूः GST के तहत कंपनी को रजिस्टर  करना भारत में किसी भी बिज़नेस के लिए जरूरी और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।आपको GST भारत के तहत रजिस्टर  करना होगा यदि आपका है / आप कर रहे हैं

  1. वार्षिक कारोबार 20 लाख से अधिक है
  2. वेबसाइट मौजूद है जहां से माल और सर्विसेज की सप्लाई होती है।
  3. पिछले कानून के तहत वैट के लिए रजिस्टर्ड
  4. अंतरराज्यीय ट्रांजैक्शंस (लेन -देन)
  5. ई-कॉमर्स एग्रीगेटर के लिए एक सप्लायर

केस 1: यदि आपकी वार्षिक बिक्री 20 लाख से कम है, तो आपको रजिस्ट्रेशन से छूट दी जाती है, दूसरे शब्दों में, आपको GST का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अगर वार्षिक बिक्री  20 लाख से ज्यादा होने कि उम्मीद है तो GST रजिस्ट्रेशन लें ।

केस 2: यदि आपकी वार्षिक बिक्री 20 से 50 लाख के बीच है आप GST कम्पोजीशन स्कीम का ऑप्शन  चुन सकते हैं, जो आपको टर्नओवर के आधार पर फ्लैट टैक्स (1-2% होने की संभावना) का भुगतान करने की अनुमति देता है।

केस 3: यदि आपकी वार्षिक बिक्री 50 लाख से अधिक है – आपको नियमित डीलर की तरह GST का भुगतान करना होगा।अच्छे होलसैलर (थोक विक्रेताओं) और डिस्ट्रीब्यूटर्स (वितरकों) के साथ जुड़ना

सप्लाई में लगने वाले समय को कम करने के लिए आपको इन होलसैलर (थोक विक्रेताओं) से अच्छी तरह से जुड़ा होना चाहिए। आपको अपने स्टॉक में तरह  तरह का काफी सामान रखना चाहिए ताकि ग्राहक जब दुकान में आए तो  आपके परदे के पीछे किये गए प्रयासों कि तारीफ करें | जितना ज्यादा सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स अच्छा होगा, उतना ही रिटेलर अच्छे ऑफर और डिस्काउंट दे पाएगा  |


अकॉउंटिंग, बिलिंग / इनवॉइस भेजना , टैक्स का हिसाब लगाना  और GST रिटर्न फाइल करना :

यह वह जगह है जहाँ सच में मुश्किल आती है । बिज़नेस सिर्फ फायदे और नुक़सान से निपटने के बारे में नहीं है, ये उस से बहुत अधिक है| विशेष रूप से GST के तहत, एक बिज़नेस शुरू करना आसान है,लेकिन असली मुश्किल इसे मैनेज करने में होती है ।

पिछली इनडायरेक्ट टैक्स (चीज़ों और सर्विसेज पर लगने वाला )रेजीम में, रिटेलर्स आमतौर पर टैक्स लायब्लिटी  से बच जाते थे क्योंकि वहाँ कोई ऐसा तरीका नहीं था जिसके द्वारा उनकी खरीद और बिक्री का पता लगाया जा सकता था। उनके ज्यादातर  लेन-देन अवैध तरीकों से किये जाते थे, जिसका अर्थ है कि खरीदार को कोई इनवॉइस जारी नहीं किया जाता है , और इस कारण से ऐसी बिक्री की बही खाते में भी कोई एंट्री नहीं की जाती थी ।

जबकि GST के तहत, हर मिलने वाले  और देने वाले ट्रांजेक्शन(लेन-देन ) को ट्रैक करना जरूरी  है, जिससे कि ये पक्का किया जा सके कि बिज़नेस सबसे अच्छे लेवल पर चल रहा है। ये  भी काफी लोग मानते हैं कि GST से बिज़नेस की गतिविधियों में भारी बदलाव होगा और रिटेल इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं रहेगी ।

GST  से जुड़े अकॉउंटिंग के बही खाते

GST में रिकॉर्ड रखना और कंप्लायंस काफी ज्यादा है और इसलिए हमें एक अकॉउंटिंग  सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है । GST अकॉउंटिंग एंट्री मुख्य परेशानियों में से एक है जिसे आपको देखना होगा । सभी बिज़नेस अब उनके बिज़नेस वाली जगह पर नीचे दिए गए  रिकॉर्ड बनाकर रख सकते हैं।

  • वस्तुओं  का उत्पादन
  • खरीदी जाने वाली और बेचीं जाने वाली  वस्तुओं की सप्लाई और घर घर जाकर दी जाने वाली सर्विसेज
  • वस्तुओं का स्टॉक
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट
  • आउटपुट टैक्स देय और भुगतान

कई सालों तक ऐसे रिकॉर्ड संभाल  कर रखना बहुत जरूरी है और इलेक्ट्रॉनिक रूप में उन्हें स्टोर करना बहुत आसान है|

GST के तहत जारी किए जाने वाले दो प्रकार के इनवॉइस

GST के तहत किसी अन्य  टैक्स देने वाले व्यक्ति को वस्तुओं या सर्विसेज  की सप्लाई के लिए एक निर्धारित रूप में  इनवॉइस जारी करने की जरूरत होगी।

  1. टैक्सेबल  इनवॉइस जो GST क्रेडिट को पास करने  के लिए जारी किया गया है।
  2. बिल ऑफ़ सप्लाई तब जारी की जानी चाहिए  जब सप्लाई पर छूट-प्राप्त है या फिर सप्लायर कम्पोजिट स्कीम के तहत आता है जिसमें  GST क्रेडिट पास नहीं करना होता है ।

1.    इनवॉइसेज जारी करने की समय सीमा क्या है?

  1. सर्विसेज देने हेतु, सर्विसेज देने के 30 दिनों के भीतर GST इनवॉइस बनाना जरुरी है
  2. सामान  के मामले में, आपकी  जगह में से सामान को हटाते समय एक इनवॉइस बनाना जरुरी है।


2. इनवॉइसेज की कितनी कॉपियों (प्रतियों ) की जरूरत  होगी?

सर्विसेज देने के मामले में,

इनवॉइसेज की 2 कॉपी : 1 – प्राप्तकर्ता, 1 – सप्लायर    

सामान बेचने के मामले में,

इनवॉइसेज की 3 कॉपी: 1 – प्राप्तकर्ता, 1 – सप्लायर 1 – ट्रांसपोर्टर

3. GST के अनुसार  इनवॉइसेज कैसे बनाएँ ?

प्रोफेशनल GST इनवॉइस जारी करने के लिए और इनवॉइस  को आसान बनाने के लिए आपको आज कल चल रही टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। यदि आप एक  अकॉउंटिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं, तो अभी सही समय है इसे GST के हिसाब से तैयार सॉफ्टवेयर में अपग्रेड करने का

मगर ध्यान रहे ! बिज़नेसज करने वालों को  बिज़नेस पर ध्यान देना चाहिए और ना कि अकॉउंटिंग पर ।

दुर्भाग्य से, ज्यादातर अकॉउंटिंग सॉफ्टवेयर अकाउंटेंट के लिए बनाए गए हैं , ना कि बिज़नेसमैन के लिए | एक रिटेलर के रूप में आप अपने अकाउंट्स पर समय नहीं बिताना चाहेंगे  बल्कि आप अपना समय अपने  बिज़नेस को आगे बढ़ाने में बिताना चाहेंगे । GST के हिसाब से तैयार  ‘व्यापार ‘ अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर , सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाले अकॉउंटिंग ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, को काम में लेना अकॉउंटिंग के तनाव से मुक्त होने के लिए एक अच्छा ऑप्शन होगा ।  प्रोफेशनल GST इनवॉइसेज को बनाना आसान हो सकता है । इसके अलावा, यह आटोमेटिक तरीके से GST कैलकुलेट करता है! ‘व्यापार ‘ ऐप निश्चित रूप से टैक्स भरने का ध्यान रखता है क्योंकि यह पहले से ही GST के  हिसाब से है। ‘व्यापार ‘ GST  अकॉउंटिंग के बारे में और जानने के लिए  यहाँ क्लिक करें

‘व्यापार ‘  ऐप इन फीचर्स के साथ आता है, जैसे कि इन्वेंट्री मैनेजमेंट, ट्रांजेक्शंस रिकॉर्डिंग, GST के हिसाब से इनवॉइस भेजने  और कई और। ‘व्यापार ‘ एप्लिकेशन से रिटेलर्स को सभी प्रकार के लेनदेन का ट्रैक रखने और कस्टम रिपोर्ट और बैलेंस शीट बनाने में मदद मिलती है। इस तरह के सॉफ्टवेयर को काम में लेने  के लिए, आपको अकॉउंटिंग की डिग्री की जरूरत नहीं है। अंत में , अगर आप अपना बिज़नेस बढ़ाने में समय बिताने के बजाय अकाउंटिंग सीखने में समय बिता रहे हैं, तो आज ही ‘व्यापार ‘ ऐप काम में लेना शुरू करें  !!!

ठीक है, सब मिलाकर, एक मुनाफ़ेवाला रिटेलर बनने के लिए, आपको बिज़नेस के नियमों को सीखना होगा और फिर आपको किसी और से बेहतर  करना होगा। तुरंत मुनाफा कमाने की बजाय जो कूटनीतिक दृष्टि से सही है वो करना ज्यादा जरूरी है| इसके अलावा आप सिर्फ रिटेलिंग में इसके चलन में होने के कारण नहीं जा सकते | इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या चीज़  बेच रहे हैं लेकिन आप तब तक मुनाफा नहीं कमा सकते/ सफल नहीं हो सकते जब तक कि आपके मन में इसके लिए जूनून और जिम्मेदारी नहीं है |

अपने GST के बोझ को कम करने के लिए और रिटेल बिज़नेस को बिना परेशानी के चलाने लिए सही टेक्नॉलजी (तकनीक) को अपनाना जरुरी है।

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