भारत में GST लागू होने के बाद छोटे बिज़नेसेज पर इसके प्रभाव

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने GST को ‘अच्छे  और आसान टैक्स’ के रूप में रखा है, जिससे छोटे बिज़नेसेज को होने वाली दिक्कतें  खत्म हो जाएँगी । हालांकि, सच्चाई इससे काफी अलग है। विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने बताया कि GST लंबे समय में फायदेमंद होगा, क्योंकि  छोटे बिज़नेसमैन  अभी भी नयी  टैक्स व्यवस्था की जरूरी जानकारियों  के बारे में पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं।

नाम न छापने का अनुरोध करते हुए, एक केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क अधिकारी का कहना है कि मुख्य समस्या यह है कि टायर-II शहरों में टैक्स इनवॉइस भेजने का कोई चलन  नहीं है, जो कि अब जरूरी हो गया है अगर सेल वैल्यू 200 रुपये से ज्यादा है । “इससे छोटे बिज़नेसेजके लिए शुरू में दिक्कत आना तय है । “

वो आगे कहते हैं कि इन शहरों में बिना मजबूत आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के,ये बिजनेसमैन अब डरे हुए हैं और आईटी में माहिर बनने कि कोशिश  कर रहे हैं | हालांकि, ये सही हैं इससे आगे जाकर ये बिज़नेसेज और ज्यादा पारदर्शी हो जाएंगे, उन्होंने कहा |

क्लियरटैक्स के संस्थापक अर्चित गुप्ता का कहना है कि वे मेट्रो शहरों में 50% से ज्यादा  ट्रैफिक देखते हैं जबकि टायर-II और टायर -III शहरों में करीब 46% ट्रैफिक है जो टैक्स की ई-फाइलिंग में  मदद चाहते हैं। “अभी, व्यक्तियों को GST रेट्स के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं और वो लोग IGST, CGST आदि के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। हैरानी कि बात तो ये है कि  कई रेस्टोरेंट्स और अन्य बिज़नेसेज अलग अलग तरह से GST चार्ज कर रहे हैं। इनवॉइस बनाने और कंप्लायंस को लेकर, बहुत असमंजस है जिसको दूर होने में अभी समय लगेगा। कुछ को तो अभी CGST और IGST का मतलब समझना बाकी है।  इसी असमंजस के चलते कई वेबसाइटें बंद हो गयी थी और बिज़नेसेज को रोक दिया गया ताकि स्थिति साफ़ हो सके । “

उन्होंने आगे बताया  कि कुल मिलाकर बिज़नेसेज को पूरी तरह से GST को अपनाने में   में लगभग 100 दिन लग सकते हैं। “टायर-II एंड टायर-III शहरों को GST लागू करने में ज्यादा  समय लगेगा हालाँकि वे इसके बारे में जानते है, फिर भी इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।”

ET से बात करते समय लखनऊ स्थित एक बिज़नेसमैन, मुदित  कौशिक, शर्मा डिपार्टमेंटल स्टोर के मालिक, जो कि शहर में 3 दुकान चलाते हैं, कहते हैं, “हम जो तरह तरह के  प्रोडक्ट्स बेचते हैं उनके फाइनल टैक्स रेट्स को लेकर बहुत ज्यादा असमंजस है । कई कंपनियां हमें तरह तरह के  प्रोडक्ट्स बेचती हैं जिन पर अलग-अलग टैक्स रेट लगेंगें लेकिन अभी भी मुझे पूरी स्थिति पर कोई स्पष्टता नहीं है। “

वे आगे बताते हैं , “यहां पर कई बिज़नेसमैन ने अभी तक GSTN के लिए रजिस्टर भी नहीं किया है।”

ग्राहकों  को हाथों से लिखे हुए बिल अभी  भी दिए जा रहे हैं क्योंकि दुकानदारों को ये पता ही नहीं है कि  ग्राहकों से क्या चार्ज करना है। उदाहरण के लिए, एक 23 वर्षीय छात्रा जो भुवनेश्वर में अपने माता-पिता से मिलने गयी,  उसने एक इन एंड आउट स्टोर में कुछ घरेलू सामान खरीदने के लिए लगभग 40 मिनट तक इंतजार किया , उन सामानों लिए उसे बाद में कोई बिल भी नहीं दिया गया ।

वह बताती  है, “वे उन लोगों के लिए होम डिलीवरी करने को तैयार थे  जो 10 से ज्यादा आइटम्स खरीदने आए थे , क्योंकि वे हर ग्राहक के लिए कागज के एक टुकड़े पर सभी जानकारियाँ  नहीं लिख सकते थे।

एक 59 वर्षीय निर्माता का कहना है कि इनवॉइस बनाने  और कंप्लायंस में असमंजस के कारण सेल्स को रोक दिया गया है। “हमारे ट्रेडर्स, जो ज्यादातर नकद में लेन देन करते हैं, अभी तक किसी भी सौदे को पक्का  करने में हिचकिचा रहे हैं| “

कोलकाता स्थित कैब सर्विस प्रोवाइडर TYGR के संस्थापक दीपांजन  पुरकायस्थ ने कहा है कि कस्बों और गॉंवों में ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके कारण  छोटे बिज़नेसेज पर खर्चे का भार बढ़ सकता है|सब कुछ डिजिटल बनाने के लिए ,छोटे बिज़नेसेज को चलाने में अतिरिक्त रनिंग कॉस्ट भी जोड़ी  जायेंगीं ।”

उन्होंने आगे बताया कि छोटे शहरों में आईटी कौशल ढूंढना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

बैंगलोर स्थित रिटेल टेक स्टार्टअप स्नैपबिज़्ज़ क्लाउडटेक के संस्थापक प्रेम कुमार का कहना है कि मौजूदा स्थिति अगले दो महीनों में बेहतर हो सकती है। “अपने सिस्टम में हो रहे बदलाव  के लिए हम छोटे रिटेलर्स मदद के लिए एक दूसरे का हाथ थाम रहे हैं ।”

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स – टेक

निष्कर्ष: जितनी जल्दी एक बिजनेसमैन GST कम्पेटिबल सॉफ़्टवेयर जैसे कि ‘व्यापार’ को काम में लेता है, उतनी  ही जल्दी भारत में बिजनेसमैन के लिए GST के कारण होने वाले बदलावों को संभालना आसान हो जाता है । अपने इन्वॉइसेज / बिल्स में GST कैसे  जोड़ें ये देखने के लिए एंड्रॉइड के लिए यहाँ और डेस्कटॉप के लिए यहाँ वीडियो देखें।

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