GST इनवॉइसेज के फैक्ट्स  (बातें)

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GST- के बाद इनवॉइस बनाने को लेकर ट्रेडर्स की चिंताओ को घटाने के लिए, CBEC , राजस्व विभाग के एक भाग, ने कहा: व्यापार मंडलों में कुछ भ्रांतियां है  कि GST इनवॉइस को एक ही निर्धारित फॉर्मेट में बनाया जा सकता है और GST इनवॉइसेज को बनाने का प्रोसेस बहुत ही तकलीफदेह होगा | ये बात बिल्कुल ग़लत है| सभी स्टेकहोल्डर्स की जानकारी के लिए इनवॉइस से सम्बंधित GST प्रोविजन्स के बारे में  कुछ ज़रूरी बातें यहाँ बताई गयी हैं| माना जा रहा है कि आज़ादी के बाद का ये सबसे बड़ा सुधार होगा जहाँ, आनेवाले इनडाइरेक्ट टैक्स शासन का मकसद होगा एक आम बाज़ार बनाने का, जिससे टैक्स के ऊपर टैक्स बचेगा और सामान और सर्विसेज सस्ती होंगी|

केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड ने GST इनवॉइस के बारें में कुछ फैक्ट्स की लिस्ट दी है:

1) सभी GST टैक्स धारकों को अपने इनवॉइस का फॉर्मेट बनाने की आज़ादी है|

2) GST के क़ानून के हिसाब से कुछ निश्चित  फ़ील्ड्स इनवॉइस में ज़रूर शामिल किए जाने चाहिए|

3) सामान और सर्विसेज के लिए इनवॉइस ज़ारी करने की निर्धारित समय सीमा अलग अलग है, जैसे कि सामान के लिए: कभी भी सामान  की डेलिवरी से पहले और सर्विसेज के लिए: जबसे सर्विसेज देनी शुरू की हैं, उसके 30 दिन के अंदर|

4) छोटे टैक्स धारक, जैसे छोटे रिटेलर्स जो ज़्यादा मात्रा में 200 रुपये तक के छोटे छोटे ट्रांजेक्शन्स, अनरजिस्टर्ड  ग्राहकों के साथ करते हैं उनको हर ट्रांजेक्शन के लिए इनवॉइस ज़ारी करना ज़रूरी नहीं है| वे हर दिन के अंत में सभी ट्रांजेक्शन के लिए एक ही  इनवॉइस ज़ारी कर सकते हैं | मगर ग्राहक के इनवॉइस मांगने पर उनको अलग इनवॉइस जारी करना होगा |

5) आम तौर पर , इनवॉइस की एक कॉपी ट्रांसपोर्टर के पास होनी चाहिए | फिर भी  GSTN (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क) इनवॉइस रेफरेन्स नंबर दिलाने में मदद करता है  और अगर टैक्स धारक इस नंबर को जेनरेट करता है तो उसके सामान को ट्रांसपोर्टेशन के समय पेपर इनवॉइस की ज़रूरत नहीं  होगी| ये तरीका ट्रांसपोर्टेशन के दौरान बार बार होने वाली गलतियों जैसे कि पेपर इनवॉइस का खोना, खराब हो जाना, फट जाना या गुम हो जाना,  से निपटने में मदद करता है |

6) छोटे टैक्स धारकों के लिए कंप्लायंस  का बोझ कम करने के लिए, GST के क़ानून में ये बताया गया है कि टैक्स धारक जिनका सालाना टर्नओवर  1.5 करोड़ तक का है उनको सामान का HSN(हार्मनाइज़्ड सिस्टम ऑफ नोमेनक्लेचर) कोड इनवॉइस में लिखने की ज़रूरत नहीं है|

7)  बैंकिंग, बीमा और  पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सेक्टर (यात्री परिवहन क्षेत्रों) में बड़े नंबर में होने वाले  ट्रांजेक्शन्स को ध्यान में रखते हुए , टैक्स धारकों को ग्राहक का पता और क्रमांक नंबर  इनवॉइस में लिखने की ज़रूरत नहीं है|

8) जब सामान डेलिवरी के लिए निकल चुका हो और उतारने के वक़्त तक हमें कितना सामान उतरना है उसका पता ना हो तो सामान को डेलिवरी चालान  में से हटा देना चाहिए और इनवॉइस डेलिवरी के बाद ज़ारी किया जाना चाहिए|

9) अगर VAT इनवॉइस ज़ारी किया गया है तो नॉन टैक्सेबल सप्लाइज पर अलग से बिल ऑफ सप्लाइ ज़ारी करने की ज़रूरत नही है|

स्रोत : NDTV.com

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